वित्त वर्ष 2025 की दूसरी छमाही में रोजगार में 7.1% की वृद्धि होगी: रिपोर्ट
इस वृद्धि को लॉजिस्टिक्स, ईवी और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और एग्रोकेमिकल्स के साथ ही ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स से बढ़ावा मिल रहा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विकास में भारी निवेश कर रहे हैं.
हाइलाइट्स
कोयंबटूर, गुड़गांव और जयपुर नौकरियों के लिए आशाजनक शहरों के रूप में उभर रहे हैं
59% कंपनियां क्लाउड-बेस्ड समाधानों को प्राथमिकता देती हैं
AI, IoT और ऑटोमेशन टूल्स रोजगार दक्षता को नया आकार देते हैं
रोजगार, रोजगार योग्यता और व्यवसाय करने में आसानी के मामले में क्रांतिकारी बदलाव ला रही, भारत की प्रमुख स्टाफिंग कंपनी टीमलीज़ सर्विसेज़ (TeamLease Services) ने अक्टूबर 2024 से मार्च 2025 तक के लिए अपनी नवीनतम इम्प्लॉयमेंट आउटलुक रिपोर्ट जारी की है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इस अवधि के दौरान रोजगार में 7.1% शुद्ध वृद्धि दर की संभावना है, जबकि पिछली छमाही में यह दर 6.33% थी. यह वृद्धि कार्यबल विस्तार की योजना बना रहे 59% नियोक्ताओं के सामूहिक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जबकि अतिरिक्त 22% अपने मौजूदा कार्यबल के स्तरों को बनाए रख रहे हैं, और 19% नियोक्ता इसमें कटौती कर सकते हैं. ये निष्कर्ष रोजगार देने के डायनेमिक परिदृश्य को दर्शाते हैं, जहां उद्योग-विशिष्ट मांग और मैक्रोइकॉनमिक कारक रोजगार के ट्रेंड को काफी हद तक आकार दे रहे हैं.
इस वृद्धि को लॉजिस्टिक्स, ईवी और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर, कृषि और एग्रोकेमिकल्स के साथ ही ई-कॉमर्स जैसे सेक्टर्स से बढ़ावा मिल रहा है, जो इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विकास में भारी निवेश कर रहे हैं. उदाहरण के लिए, लॉजिस्टिक्स 14.2% शुद्ध रोजगार परिवर्तन के साथ सबसे आगे है, क्योंकि इस सेक्टर की 69% कंपनियां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने पर विचार कर रही हैं. इस वृद्धि का श्रेय कई कारकों को जाता है, जैसे कि इस सेक्टर द्वारा 5जी लॉजिस्टिक्स को अपनाना, ग्रीन सप्लाई चेन पहल, और राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स नीति कार्यान्वयन से होने वाले लाभ. लॉजिस्टिक्स के बाद ईवी और ईवी इंफ्रास्ट्रक्चर (12.1%), कृषि और एग्रोकेमिकल्स (10.5%), और ई-कॉमर्स और टेक स्टार्टअप्स (8.9%) हैं, जहां स्टार्टअप्स एआई से सक्षम कस्टमर इनसाइट, वेब 3.0 एप्लिकेशन, और त्यौहारी अवधि के दौरान आने वाली सीज़नल मांग का लाभ उठा रहे हैं. जैसे-जैसे तकनीक विकसित होती जा रही है, ऑटोमोटिव उद्योग भी 8.5% की वृद्धि देखने को मिल रही है जिसे एकीकृत स्मार्ट तकनीकों से समर्थन मिला है, जबकि रिटेल सेक्टर की 8.2% वृद्धि हाइपरलोकल डिलीवरी और स्मार्ट-स्टोर कॉन्सेप्ट की लोकप्रियता को दर्शाती है.
उद्योग के इन ट्रेंड्स के साथ-साथ, रोजगार निर्माण में भौगोलिक बदलाव भी सामने आ रहे हैं, जहां नए शहर तेज़ी से प्रतिभाओं को आकर्षित कर रहे हैं. कोयंबटूर (24.6%) और गुड़गांव (22.6%) जैसे शहर रोजगार के केंद्र बन रहे हैं, और पारंपरिक महानगरों से अलग रोजगार के अवसरों के विकेंद्रीकरण को आगे बढ़ा रहे हैं. भले ही बेंगलुरु (53.1%), मुंबई (50.2%), और हैदराबाद (48.2%) कार्यबल में बहुत ज्यादा मांग के साथ प्रमुख रोजगार केंद्र बने हुए हैं, लेकिन कोयंबटूर, गुड़गांव, जयपुर, लखनऊ और नागपुर जैसे शहरों में बढ़ती मांग से पूरे भारत में नौकरी की वृद्धि के व्यापक प्रसार के संकेत मिलते हैं, जिससे पता चलता है कि नौकरी चाहने वालों और कंपनियों दोनों के लिए छोटे शहर व्यवहार्य विकल्प के रूप में तेज़ी से उभर रहे हैं.
दक्षताओं पर विचार करते हुए, कंपनियां केवल पदों को भरना बस नहीं चाह रही हैं, बल्कि वे आज की परिचालन और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप खास कौशल को भी तलाश रही हैं. नई नौकरियां में समस्या-समाधान (35.3%), समय प्रबंधन (30.4%), और आफ्टर-सेल्स सर्विस (28.4%) जैसी दक्षताओं की मांग काफी बढ़ती जा रही हैं, जबकि संचार (57.8%), बिक्री और मार्केटिंग (44.6%), और क्रिटिकल थिंकिंग (37.3%) जैसी दक्षताओं वाली मौजूदा नौकरियां अब भी आवश्यक बनी हुई हैं. प्रतिस्पर्धी परिदृश्य में, मशीनरी ऑपरेशन और मैंटनेंस (24.1%) और टीम सहयोग (23.1%) सहित तकनीकी कौशल संगठनों के विस्तार के साथ उत्पादकता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं.
विभिन्न उद्योगों में तकनीक को अपनाने में आया उछाल उत्पादकता पर इस फोकस का समर्थन करता है. उल्लेखनीय रूप से 59% कंपनियां रिमोट और हाइब्रिड वर्क मॉडल की सहूलियत के लिए क्लाउड-आधारित समाधानों को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे काम को लेकर सहूलियत भरे माहौल की ओर होते झुकाव का पता चलता है. 45% कंपनियों द्वारा पसंद किए जाने वाले ऑटोमेशन टूल, कामों को दोहराने की संभावना को कम करने में महत्वपूर्ण हैं, और आईओटी (37%), एमआई/एमएल (36%), और एडवांस्ड एनालिटिक्स (29%) जैसी उभरती हुई तकनीकें ऑटोमोटिव, हेल्थकेयर, और उत्पादन जैसे सेक्टर्स में रिअल टाइम में निर्णय लेने में सक्षम बना रही हैं. यह तकनीकी एकीकरण संपूर्ण कार्यबल दक्षता को बढ़ाने में डिजिटल बउलाव की कार्यनीतिक भूमिका को दर्शाता है.
मांग में उतार-चढ़ाव के जवाब में, खास तौर पर त्योहारी सीज़न के आसपास, ई-कॉमर्स (89%), रिटेल (86%) और लॉजिस्टिक्स (83%) जैसे सेक्टर सुविधाजनक वर्कफोर्स मॉडल में सबसे आगे हैं, जिससे पीक अवधि के दौरान संचालन और सेवाओं को प्रभावी ढंग से बढ़ाने में मदद मिलती है. हालांकि, ऑटोमोटिव (82%) जैसे कुछ उद्योग अलग तरीके से अनुकूलन करते हुए, अपने कार्यबल का विस्तार करने के बजाय काम के घंटे को बढ़ाने का विकल्प चुन रहे हैं, जिससे पेरोल के खर्चों को बढ़ाए बिना ज़्यादा मांग को संभालने के लिए एक संसाधनपूर्ण दृष्टिकोण का पता चलता है.
प्रमुख आर्थिक पहलें भी कार्यबल विस्तार को आकार दे रही हैं. वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) जैसी नीतियां, जिन्हें लेकर अनुमान है कि वे 2025 तक भारतीय अर्थव्यवस्था में 60 बिलियन यूएस डॉलर का योगदान देंगी, तकनीक और अनुसंधान एवं विकास में ज़्यादा कौशल वाली नौकरियां पैदा कर रही हैं. इस बीच, नेशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर्स ने उत्पादन और लॉजिस्टिक्स में 1 मिलियन प्रत्यक्ष नौकरियों और 3 मिलियन अप्रत्यक्ष नौकरियां पैदा करने का लक्ष्य रखा है. सेमीकंडक्टर मिशन 2025 तक ₹1.25 लाख करोड़ के निवेश से 80,000 नौकरियां का योगदान देना चाहता है, जिससे हाई-टेक उत्पादन में भारत की मुहिम का पता चलता है.
टीमलीज़ के वीपी और बिज़नेस हेड, कृष्णेंदु चटर्जी ने कहा, “हमने भारत में कार्यबल के डायनेमिक्स में एक महत्वपूर्ण मोड़ को देखा है. संख्याओं से इतर, जो बात महत्वपूर्ण है वह तकनीकी को अपनाने और कार्यबल दक्षता की बढ़ती परस्पर निर्भरता है. उद्योग अब केवल कर्मचारियों की संख्या संबंधी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए भर्ती नहीं कर रहे हैं, बल्कि वे कार्यनीतिक रूप से कार्यबल कुशलताओं को विकसित होते बिज़नेस मॉडल के साथ जोड़ रहे हैं. उदाहरण के लिए, क्लाउड को अपनाने, एआई और आईओटी के एकीकरण में वृद्धि न केवल व्यवसायों के संचालन के तरीके को बदल रही है, बल्कि ज़रूरी भूमिकाओं और कौशल को भी नए सिरे से तय कर रही है. ये ट्रेंड बताते हैं कि कार्यबल में वृद्धि को लेकर क्वालिटी पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है, जहां उत्पादकता, नवाचार और अनुकूलनशीलता विस्तार जितने ही महत्वपूर्ण हैं. इससे निरंतर जटिल होते बाज़ार में लंबे समय तक विकसित होने में मदद मिलेगी. यह कंपनियों के लिए न केवल नौकरियों का निर्माण करने का बल्कि मजबूत, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण करने का भी अवसर है, जो तेज़ी से बदलते आर्थिक माहौल में फल-फूल सकते हैं.”
इन विकासों के मद्देनज़र, कार्यबल की कार्यनीतियां कार्यबल संरचना को प्रभावित करने वाले आर्थिक और तकनीकी बदलावों को संतुलित करते हुए, प्रतिभा अधिग्रहण और प्रतिधारण पर ज़्यादा फोकस करती हैं. बीएफएसआई, फिनटेक, और पावर और एनर्जी सेक्टर एआई एकीकरण, विनियामक शर्तों, नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिकाओं और डिजिटल वित्तीय समावेशन से प्रेरित होकर लक्षित विस्तार से गुज़र रहे हैं. इन बदलावों के जवाब में, 58% संगठन आर्थिक हालातों के आधार पर कार्यबल नीतियों में बदलाव कर रहे हैं, जबकि 39% विशिष्ट डिजिटल कौशल की ज़रूरत वाली तकनीकी प्रगति को अपनाते हैं. कंपनियां भी कर्मचारियों को बनाए रखने के प्रति उतनी ही सजग हैं, और कर्मचारी मान्यता कार्यक्रम (65%), करियर विकास के अवसरों (63%), बेहतर कार्य-जीवन संतुलन कार्यक्रम (53%) और कार्य के सुविधाजनक घंटों (41%) को अपना रही हैं, ताकि महामारी के बाद कर्मचारियों की बढ़ती उम्मीदों के अनुरूप काम करने के मददगार माहौल को बढ़ावा दिया जा सके.
इन निष्कर्षों पर विचार करते हुए, टीमलीज़ स्टाफिंग के सीईओ कार्तिक नारायण ने कहा, “रोजगार के इस परिदृश्य ने तेज़ी से तकनीक और नीति-संचालित बदलावों को आकार दिया है. हमारे नवीनतम निष्कर्ष भारत भर में, स्थापित शहरों से लेकर उभरते शहरों तक, नौकरी की वृद्धि में आ रही विविधता को दर्शाते हैं, और ईवी और टेक स्टार्टअप जैसे सेक्टर्स में मांगों को पूरा करने के लिए तेज़ी से विकसित हो रहे कार्यबल को प्रकट करते हैं. जबकि कंपनियां सुविधाजनक स्टाफिंग मॉडल को अपना रही हैं, समस्या-समाधान, क्रिटिकल थिंकिंग और क्लाउड तकनीक जैसे डिजिटल कौशल न केवल मांग में हैं, बल्कि आज की अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रखने के लिए ज़रूरी भी हैं. इसके अलावा, हमारी सरकार द्वारा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश और सेमीकंडक्टर मिशन जैसी पहलों से न केवल रोजगार पैदा हो रहे हैं, बल्कि भारत भी हाई-टेक उत्पादन में ग्लोबल लीडर के रूप में स्थापित हो रहा है. प्रतिभा अधिग्रहण नीतियों को इन ट्रेंड्स के साथ जोड़कर, कंपनियां भारत के विकास पथ को स्थायी रूप से समर्थन देने के लिए तैयार हैं.”